पटना, 1 जून : अहसास कलाकृति, पटना के बैनर तले वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद कुमार सिंह द्वारा लिखित नाटक चमगादड़ की रात का शुभ मुहूर्त जनता रोड, गर्दनीबाग स्थित परिसर में संपन्न हुआ।

नाटक का निर्देशन प्रसिद्ध रंगकर्मी कुमार मानव कर रहे हैं। इस नाटक का मंचन आगामी जुलाई माह में प्रेमचंद रंगशाला, पटना में किया जाएगा।
चमगादड़ की रात समकालीन समाज में व्याप्त मानसिक अंधेपन, सत्ता की संवेदनहीनता तथा बढ़ती स्वार्थपरक प्रवृत्तियों पर केंद्रित एक प्रभावशाली व्यंग्यात्मक नाटक है।
नाटक की कथा एक ऐसे गाँव के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ के लोग अपनी गंभीर समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर राजधानी पहुँचते हैं।
स्थानीय प्रशासन से निराश ग्रामीणों का नेतृत्व शंकर करता है, जो सत्य और न्याय के पक्ष में अडिग रहता है। दूसरी ओर सदानंद, मदारी और अन्य पात्र अवसरवादिता तथा निजी स्वार्थों के अनुसार अपने व्यवहार को संचालित करते हैं।
राजधानी पहुँचने पर ग्रामीणों की मुलाकात राजा सिलसिला और उसके प्रशासनिक तंत्र से होती है। सत्ता के अहंकार में डूबा राजा समस्या के समाधान के बजाय एक समिति गठित कर मामले को टाल देता है।
समिति के सदस्य भी जनहित की अपेक्षा अपने व्यक्तिगत लाभ और सुविधाओं को अधिक महत्व देते हैं।
परिणामस्वरूप वे सभी अपने स्वार्थ के अंधकार में डूबकर ऐसे “चमगादड़” बन जाते हैं, जो वास्तविकता, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों से कट चुके हैं।
हास्य और तीखे व्यंग्य के माध्यम से नाटक यह संदेश देता है कि जब व्यक्ति अपनी जड़ों, सामाजिक जिम्मेदारियों और मानवीय संवेदनाओं से विमुख होकर केवल निजी लाभ के पीछे भागता है, तब उसका दृष्टिकोण संकुचित हो जाता है और समाज को उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
मुहूर्त समारोह के अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी विश्वमोहन चौधरी ‘संत’ ने उपस्थित कलाकारों एवं निर्देशक कुमार मानव को नाटक की सफल एवं प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर रंगकर्मी सरबिंद कुमार, विजय कुमार चौधरी, भुनेश्वर कुमार, राजकिशोर पासवान, संतोष कुमार, मयंक कुमार तथा सुदर्शन सिंह सहित अनेक रंगकर्मी उपस्थित रहे।
मुहूर्त के उपरांत नाटक का सामूहिक पाठ आयोजित किया गया। नाटक की विषयवस्तु और उसकी आत्मा को समझते हुए निर्देशक कुमार मानव ने कलाकारों के बीच पात्रों का चयन कर उनके निर्वहन की जिम्मेदारियाँ सौंपीं। नाटक की तैयारी अब नियमित रूप से प्रारंभ कर दी गई है।
